नीति वाणी

*नीति वाणी*
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*१--*
*इंसान भी कमाल है*
*ड्रामे में लोगों का दुःख दर्द देख कर रो पड़ता है* *और*
*असल में लोगों के दुःख दर्द को ड्रामा समझता है*

*२--*
*स्पष्ट बोलने वाला व्यक्ति इंजेक्शन की तरह होता है , इसमें दर्द थोड़ी देर के लिए होता है  लेकिन फायदा जीवन भर रहता है।*

*३--*
*यक्ष उवाच*
*अक्षयो नरकः केन प्राप्यते भरतर्षभ!।*
*एतन्मे पृच्छतः प्रश्नं तच्छीघ्रं वक्तुमर्हसि॥*

*युधिष्ठिर उवाच*
*विद्यमाने धने लोभात् दानभोगविवर्जितः।*
*पश्चान्नास्तीति यो ब्रूयात् सोऽक्षयं नरकं व्रजेत्॥*

*अर्थात् 👉 यक्ष ने पूछा - हे भरतर्षभ! अक्षय नरक को कौन पता है ? इसका उत्तर आप मुझे शीघ्र दीजिए।*
*युधिष्ठिर ने उत्तर दिए 👉 धन के विद्यमान रहने पर भी लोभवश जो न दान देता है, न भोग करता है और दान देने का निमंत्रण देकर कहता है मैं नहीं दूंगा ऐसे व्यक्ति अक्षय नरक में जाते हैं।*
*(महाभारत, वनपर्व - ३१३/१०३ व १०६)*

*४--*
*यक्ष उवाच*
*राजन्कुलेन वृत्तेन स्वाध्यायेन श्रुतेन वा।*
*ब्राह्मण्यं केन भवति प्रब्रूह्येतत् सुनिश्चितम्॥*

*युधिष्ठिर उवाच*
*वृत्तं यत्नेन संरक्ष्यं ब्राह्मणेन विशेषतः।*
*अक्षीणवृत्तो न क्षीणो वृत्ततस्तु हतो हतः॥*

*अर्थात् 👉 यक्ष ने पूछा - हे राजन्! कुल, सदाचार, वेदादिका पढ़ना और शास्त्रों को सुनना इनमे से किससे ब्राह्मणत्व आता है, इसे अच्छे से मुझे बताइए।*
*युधिष्ठिर ने उत्तर दिए - ब्राह्मण को विशेष प्रयत्न कर आचरण की रक्षा करनी चाहिए, जिसका आचरण क्षीण नहीं होता वह कभी क्षीण नहीं होता और जिसका आचरण क्षीण हो जाता है वह विनष्ट हो जाता है।*
*(महाभारत, वनपर्व - ३१३/१०७ व १०९)*

*५--*
*"व्यक्तित्व" की भी*
*अपनी वाणी होती है जो 'कलम' या 'जीभ' के इस्तेमाल के बिना लोगों के 'अंर्तमन' को छू जाती है.*   

*६--*
*उच्च विचार*
*उम्मीद और भरोसा कभी गलत नहीं होते..*
*बस ये हम पर निर्भर करता है की...*
*हमने किससे उम्मीद की और किस पर भरोसा किया......*

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