श्री रामचन्द्राष्टकम् एक अद्वितीय और पवित्र स्तोत्र है जो भगवान श्रीराम को समर्पित है। यह स्तोत्र उनके अद्वितीय गुणों और महानता का वर्णन करता है। इसका पाठ व्यक्ति के मन और आत्मा को शांति प्रदान करता है। आइए इस दिव्य स्तोत्र के प्रत्येक श्लोक का अर्थ और महत्व जानें।
### श्लोक 1: चिदाकारो धातापरमसुखदः
चिदाकारो धातापरमसुखदः पावन-
तनुर्मुनीन्द्रैर्यो-गीन्द्रैर्यतिपतिसुरेन्द्रैर्हनुमता।
सदा सेव्यः पूर्णोजनकतनयाङ्गः सुरगुरू
रमानाथो रामो रमतुमम चित्ते तु सततम्॥
**अर्थ:** भगवान राम, जो परम सुखदायी हैं, मुनियों, योगियों, यतियों और देवताओं द्वारा सदा सेवित हैं। वे जनक की पुत्री सीता के साथ हैं और हमारे चित्त में सदा रमण करें।
### श्लोक 2: मुकुन्दो गोविन्दोजनकतनयालालितपदः
मुकुन्दो गोविन्दोजनकतनयालालितपदः
पदं प्राप्तायस्याधमकुलभवा चापि शबरी।
गिरातीतोऽगम्योविमलधिषणैर्वेदवचसा
रमानाथो रामो रमतुमम चित्ते तु सततम्॥
**अर्थ:** भगवान राम, जिनके चरणों में शबरी जैसे आदमकुल की भी प्राप्ति हुई है, वे वेदवचनों से परे और विमल धिषणाओं से अगम्य हैं। वे हमारे चित्त में सदा रमण करें।
### श्लोक 3: धराधीशोऽधीशःसुरनरवराणां
धराधीशोऽधीशःसुरनरवराणां रघुपतिः
किरीटी केयूरीकनककपिशः शोभितवपुः।
समासीनः पीठेरविशतनिभे शान्तमनसो
रमानाथो रामो रमतुमम चित्ते तु सततम्॥
**अर्थ:** भगवान राम, जो धराधीश और सुरनरवरों के अधीश हैं, रघुपति हैं, किरीटी और केयूरी हैं। वे शान्त मन से सूर्य के समान पीठ पर विराजमान हैं और हमारे चित्त में सदा रमण करें।
### श्लोक 4: वरेण्यः शारण्यःकपिपतिसखश्चान्तविधुरो
वरेण्यः शारण्यःकपिपतिसखश्चान्तविधुरो
ललाटे काश्मीरोरुचिरगतिभङ्गः शशिमुखः।
नराकारो रामोयतिपतिनुतः संसृतिहरो
रमानाथो रामो रमतुमम चित्ते तु सततम्।॥
**अर्थ:** भगवान राम, जो वरेण्य और शारण्य हैं, कपिपति हनुमान के सखा हैं। उनके ललाट पर काश्मीरी रंग की छटा है और वे शशिमुख हैं। वे नराकार, यतिपतिनुत और संसृति हरने वाले हैं, हमारे चित्त में सदा रमण करें।
### श्लोक 5: विरूपाक्षः कश्यामुपदिशियन्नाम शिवदं
विरूपाक्षः कश्यामुपदिशियन्नाम शिवदं
सहस्त्रं यन्नाम्नां पठतिगिरिजा प्रत्युषसि वै।
स्वलोके गायन्तीश्वरविधिमुखायस्य चरितं
रमानाथो रामो रमतुमम चित्ते तु सततम्॥
**अर्थ:** भगवान राम, जिनके सहस्त्र नामों का पाठ गिरिजा ने किया था, वे स्वलोके गायन करने वाले हैं। वे हमारे चित्त में सदा रमण करें।
### श्लोक 6: परो धीरोऽधीरोऽसुरकुल-भवश्चासुरहरः
परो धीरोऽधीरोऽसुरकुल-भवश्चासुरहरः
परात्मा सर्वज्ञोनरसुरगणैर्गीतसुयशाः।
अहल्याशापघ्नःशरकरऋजुः कौशिकसखो
रमानाथो रामो रमतुमम चित्ते तु सततम्॥
**अर्थ:** भगवान राम, जो परो और धीरो हैं, असुरों का नाश करने वाले हैं। वे सर्वज्ञ और नरसुरगणों द्वारा गीत गाए जाते हैं। वे अहल्या के शाप को हरने वाले, शरकर और कौशिक के सखा हैं। वे हमारे चित्त में सदा रमण करें।
### श्लोक 7: हृषीकेशः शौरिर्धरणि-धरशायी मधुरिपु
हृषीकेशः शौरिर्धरणि-धरशायी मधुरिपु-
रुपेन्द्रोवैकुण्ठोगजरिपुहरस्तुष्टमनसा।
बलिध्वंसी वीरोदशरथसुतो नीतिनिपुणो
रमानाथो रामो रमतुमम चित्ते तु सततम्॥
**अर्थ:** भगवान राम, जो हृषीकेश, शौरि, धराधरशायी, मधुरिपु, रुपेन्द्र, वैकुण्ठ, गजरिपुहर और तुष्टमनसा हैं। वे बलिध्वंसी, वीर, दशरथसुत और नीतिनिपुण हैं। वे हमारे चित्त में सदा रमण करें।
### श्लोक 8: कविः सौमित्रीड्यःकपटमृगघाती वनचरो
कविः सौमित्रीड्यःकपटमृगघाती वनचरो
रणश्लाघी दान्तोधरणिभरहर्ता सुरनुतः।
अमानी मानज्ञोनिखिलजनपूज्यो हृदिशयो
रमानाथो रामो रमतुमम चित्ते तु सततम्॥
**अर्थ:** भगवान राम, जो कवि, सौमित्री के द्वारा पूजित, कपट मृग को मारने वाले, वनचर, रणश्लाघी, दान्त, धराभरहर्ता और सुरनुत हैं। वे अमानी, मानज्ञ और सभी जनों द्वारा पूजित हैं। वे हमारे हृदय में सदा विराजमान रहें।
### समापन
**श्री रामचन्द्राष्टकम्** का पाठ हमें भगवान राम के दिव्य गुणों का स्मरण कराता है और उनके चरणों में भक्ति की भावना जागृत करता है। इस पवित्र स्तोत्र का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि आती है।
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**आभार:**
**पं. शशी भूषण शास्त्री**
**मो. 9755070636**
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