गौरीतिलक मंडल पूजन आवाहन मंत्र का उपयोग पूजा विधि में देवी गौरी की स्थापना और आह्वान के लिए किया जाता है। यह प्रक्रिया विस्तृत होती है और इसमें विभिन्न देवताओं और देवी-देवताओं का आह्वान एवं पूजा शामिल होती है। यहां इस प्रक्रिया को क्रमवार वर्णित किया गया है:
गौरीतिलक मंडल पूजन आवाहन मंत्र
चरण 1: मंडल के मध्य में माँ गौरी का ध्यान
गौरीतिलक मंडल ध्यान:
मंत्र:
"ॐ गौर्यै नमः गौरीम् आवाहयामि स्थापयामि।"
चरण 2: कोणों में देवताओं का आह्वान
ईशान कोण:
"ॐ महाविष्णवे नमः। महाविष्णुम् आवाहयामि स्थापयामि।"
आग्नेय कोण:
"महालक्ष्म्यै नमः। महालक्ष्मीम् आवाहयामि स्थापयामि।"
नैऋत्य कोण:
"महेश्वराय नमः। महेश्वरम् आवाहयामि स्थापयामि।"
वायव्य कोण:
"महामायाय नमः। महामायाम् आवाहयामि स्थापयामि।"
चरण 3: श्वेत कोष्ठों के देवता की पूजा
पूर्व:
"ऋग्वेदाय नमः। ऋग्वेदम् आवाहयामि स्थापयामि।"
दक्षिण:
"यजुर्वेदाय नमः। यजुर्वेदम् आवाहयामि स्थापयामि।"
पश्चिम:
"सामवेदाय नमः। सामवेदम् आवाहयामि स्थापयामि।"
उत्तर:
"अथर्ववेदाय नमः। अथर्ववेदम् आवाहयामि स्थापयामि।"
चरण 4: परिधि समीपे देवताओं का आह्वान
पूर्व श्वेत कोष्ठ:
"ॐ अद्भ्यो नमः। अप आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ जलोद्भयो नमः। जलोद्भयम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ ब्रह्मणे नमः। ब्रह्माणम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ प्रजापतये नमः। प्रजापतिम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ शिवाय नमः। शिवम् आवाहयामि स्थापयामि।"
चरण 5: अग्निकोण के श्वेत कोष्ठकों में
मंत्र:
"ॐ अनंताय नमः। अनंतम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ परमेष्ठिने नमः। परमेष्ठिनम् आवाहयामि स्थापयामि।"
चरण 6: अग्निकोण खण्ड के कृष्ण कोष्ठकों में
मंत्र:
"ॐ धात्रे नमः। धातारम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ विधात्रे नमः। विधातारम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ अर्य्यम्णे नमः। अर्य्यमणम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ मित्राय नमः । मित्रम् आवाहयामि स्थापयामि।"
चरण 7: दक्षिण दिशा में श्वेत कोष्ठकों में
मंत्र:
"ॐ वरुणाय नमः। वरुणम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ अंशुमते नमः। अंशुमन्तम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ भगाय नमः। भगम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ इंद्राय नमः। इन्द्रम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ विवश्वते नमः। विवश्वन्तम् आवाहयामि स्थापयामि।"
चरण 8: नैऋत्यकोण के श्वेत कोष्ठकों में
मंत्र:
"ॐ पूष्णे नमः। पूष्णम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ पर्जन्याय नमः । पर्जन्यम् आवाहयामि स्थापयामि।"
चरण 9: नैऋत्यकोण खण्ड के कृष्ण कोष्ठकों में
मंत्र:
"ॐ त्वष्ट्रे नमः। त्वष्टाम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ दक्षयज्ञाय नमः। दक्षयज्ञम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ देववसवे नमः। देववसुम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ महासुताय नमः। महासुतम् आवाहयामि स्थापयामि।"
चरण 10: पश्चिम दिशा में श्वेत कोष्ठकों में
मंत्र:
"ॐ सुधर्मणे नमः। सुधर्माणम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ शङ्खपदे नमः। शङ्खपदम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ महाबाहवे नमः। महाबाहुम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ वपुष्मते नमः। वपुष्मन्तम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ अनंताय नमः। अनंतम् आवाहयामि स्थापयामि।"
चरण 11: वायव्य कोण के श्वेत कोष्ठकों में
मंत्र:
"ॐ महेरणाय नमः। महेरणम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ विश्वावसवे नमः । विश्ववावसुम् आवाहयामि स्थापयामि।"
चरण 12: वायव्य खण्ड के कृष्ण कोष्ठकों में
मंत्र:
"ॐ सुपर्वणे नमः। सुपर्वाणम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ विष्टराय नमः। विष्टरम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ रुद्रदेवताय नमः। रुद्रदेवताम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ ध्रुवाय नमः। ध्रुवाम् आवाहयामि स्थापयामि।"
चरण 13: उत्तर दिशा में श्वेत कोष्ठकों में
मंत्र:
"ॐ धराय नमः। धराम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ सोमाय नमः। सोमम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ आपवत्साय नमः। आपवत्सम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ नलाय नमः। नलम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ अनिलाय नमः। अनिलम् आवाहयामि स्थापयामि।"
चरण 14: ईशान कोण खण्ड में कृष्ण कोष्ठकों में
मंत्र:
"ॐ आवर्त्ताय नमः। आवर्त्तम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ सांवर्त्ताय नमः। सांवर्त्तम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ द्रोणाय नमः। द्रोणम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ पुष्कराय नमः। पुष्करम् आवाहयामि स्थापयामि।"
चरण 15: ईशान कोण के श्वेत कोष्ठों में
मंत्र:
"ॐ प्रत्युषाय नमः। प्रत्युषम् आवाहयामि स्थापयामि।"
"ॐ प्रभासाय नमः। प्रभासम् आवाहयामि स्थापयामि।"
हृदयादि सहित सम्पूर्ण अंगों का पूजन
शिरोङ्ग शक्ति:
ईशान कोण की हरित श्रृंखला में ११ कोष्ठों में वायव्य से ईशान की ओर:

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