नवरात्र में शक्ति साधना और मां दुर्गा
की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय दुर्गा सप्तशती का पाठ है।
नवरात्रि के दिन विधिपूर्वक मां की कलश स्थापना के साथ शतचंडी, नवचंडी, दुर्गा सप्तशती और
देवी अथर्वशीर्ष का पाठ किया जाता है। दुर्गा सप्तशती, महर्षि वेदव्यास
द्वारा रचित मार्कण्डेय पुराण का एक हिस्सा है,
जिसमें देवी महात्म्य के 700 श्लोक का वर्णन है।
इसमें तेरह अध्याय और तीन चरित्र विभाग हैं,
जिसमें देवी के अद्भुत गुणों और महिमा
का विवरण है।
दुर्गा सप्तशती के छह अंग हैं, जो इसके तेरह
अध्यायों से अलग हैं। ये अंग इस प्रकार हैं:
- कवच - देवी के कवच मंत्र
- कीलक
- शक्तियों को जागृत करने वाला
- अर्गला
- देवी की कृपा प्राप्त करने हेतु
सप्तशती में छः संवाद भी आते हैं। इसे
दुर्गा-पाठ या चंडी-पाठ भी कहते हैं। महर्षि मेधा ने सर्वप्रथम राजा सुरथ और समाधि
वैश्य को दुर्गा का चरित्र सुनाया,
और बाद में इसे मार्कण्डेय ने जैमिनी
ऋषि से साझा किया। यह कथा लोक में सर्वत्र प्रचारित हुई।
देवी
के विभिन्न स्वरूप और उपासना
दुर्गा सप्तशती में देवी के नौ स्वरूपों
का वर्णन है, जिन्हें 'नव दुर्गा' कहा जाता है। इनकी उपासना नवरात्र के नौ दिनों में की जाती है।
श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ मनोरथ सिद्धि के लिए किया जाता है क्योंकि यह धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, चारों पुरुषार्थों को
प्रदान करने में समर्थ है।
देवी
की प्रार्थना और मंत्र
दुर्गा सप्तशती में देवी से की गई
प्रार्थनाएँ विभिन्न समस्याओं का समाधान करती हैं:
- शरण में आने वालों के लिए प्रार्थना:
शरणागत-दीनार्त-परित्राण-परायणे! सर्वस्यार्तिंहरे देवि! नारायणि!
नमोऽस्तुते॥
इस
प्रार्थना से देवी दीन और आर्तजनों की सहायता करती हैं।
- सर्वकल्याण के लिए प्रार्थना:
सर्व मंगलं मांगल्ये शिवे सर्वाथ साधिके।
शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते॥
इस
मंत्र का उच्चारण देवी से सभी प्रकार के मंगल के लिए किया जाता है।
- बाधा मुक्ति हेतु:
सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यों मत्प्रसादेन भवष्यति न संशय॥
यह
मंत्र जीवन में आने वाली हर प्रकार की बाधा को दूर करता है।
- आरोग्य और सौभाग्य प्राप्ति हेतु:
देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
देवी
का यह मंत्र आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए विशेष रूप से प्रभावी माना गया
है।
- रोग नाश के लिए:
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता हाश्रयतां प्रयान्ति॥
यह
मंत्र रोगों का नाश करने में सहायक होता है।
- दु:ख-दारिद्र्य नाश के लिए:
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः।
स्वस्थै स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि॥
यह
मंत्र दु:ख और दारिद्र्य को दूर करने में सहायक होता है।
पाठ
विधि
नवरात्रि में प्रातः स्नान कर देवी का
स्मरण करें और उनकी मूर्ति या चित्र का पूजन करें। मां के कल्याणकारी स्वरूप का
ध्यान कर शुद्ध आसन पर बैठकर माला से मंत्रों का जाप करें। समयाभाव में केवल 10 बार मंत्र का जाप
करने से भी मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं। पूरा पाठ न कर पाने पर भी श्रद्धापूर्वक
पाठ करने से देवी प्रसन्न होती हैं और सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं।
देवी
के महात्म्य का महत्व
देवी का महात्म्य, दु:स्वप्न, ग्रहदोष और अन्य
समस्याओं के निवारण के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। देवी से प्रार्थना करने से
वह अपने भक्तों की इच्छा पूरी करती हैं। नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का
विधिवत पाठ कर देवी से शक्ति, स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना की जाती है।
इस प्रकार, नवरात्रि में देवी
दुर्गा की कृपा पाने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ एक श्रेष्ठ उपाय है।

0 टिप्पणियाँ