108 की संख्या हिंदू धर्म और वैदिक संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह रहस्यमय और चमत्कारी अंक न केवल आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य में, बल्कि वैज्ञानिक और खगोलीय दृष्टिकोण से भी गहरी महत्ता रखता है। आइए, 108 के पीछे छिपे रहस्यों और इसके महत्व को समझें।
108 का अद्वितीय महत्व
1. ञुन्य 108 प्रकाशों के उत्पन्नों का जप
लोगों की च्क्रका के आधार जो 108 प्रकाश के आग्रे के प्रभावों की जलनी कारी करती है। यह शरीरीक और मानसिक गतिविधियों के लिए आवश्यक है।
जन्यू (माला)की परिधि = चार अंगुलों की 27 गुणाकार है।
प्रत्येक नक्षत्र के चरणों की संख्या = 108
2. खगोली आग्रे में 108 का माहत्व
पृथ्वी से सूर्य की दूरी / व्यास = 108
पृथ्वी से चंद्र की दूरी / व्यास = 108
3. शरीरीक जीवन के मूल राह
प्रकृति के 8 गुण: काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, ज्ञान और वैराग
जीव के चयन के लिए एक एक जिवात्मा को निर्दिष्ट किया जाता कीन् शुन्य
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