🌸 वसंत नवरात्रि 2025: सम्पूर्ण पूजा विधि, नियम व व्रत विवरण
📅 लेखक: पं. शशी भूषण दास
वसंत नवरात्रि, जिसे शुक्ल पक्ष की चैत्र नवरात्रि भी कहते हैं, देवी दुर्गा की उपासना का एक अत्यंत शुभ काल है। यह नौ दिन माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का पर्व है।
👉 2025 में वसंत नवरात्रि की पूजा विधि निम्नलिखित है:
🔶 1. प्रतिपदा (पहला दिन) – कलश स्थापना एवं शैलपुत्री पूजन
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प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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पूजा स्थल को शुद्ध करें और मिट्टी या ताम्र पात्र में जौ बोएं।
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कलश में गंगाजल या शुद्ध जल भरें, स्वास्तिक बनाएं, आम के पत्ते रखें, नारियल स्थापित करें।
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माँ दुर्गा का आवाहन करें और माँ शैलपुत्री की पूजा करें।
🔅 2. प्रतिदिन की पूजा विधि
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प्रातः व संध्या दोनों समय पूजा करें।
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दुर्गा सप्तशती के मंत्र, दुर्गा चालीसा, और देवी स्तोत्रों का पाठ करें।
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लाल पुष्प, धूप, दीप, कपूर और नैवेद्य अर्पित करें।
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सात्विक भोग जैसे फल, दूध, मिश्री, खीर आदि चढ़ाएं।
🍎 3. व्रत नियम और आहार
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पूरे नौ दिन व्रत या फलाहार करें।
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तामसिक आहार (मांस, लहसुन, प्याज) से परहेज करें।
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मन को शांत, शुद्ध और भक्ति भाव में रखें।
🕯 4. अखंड ज्योत जलाना
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पूजास्थल पर घी या तेल की अखंड ज्योत प्रज्वलित करें।
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यह माँ की कृपा व संरक्षण का प्रतीक है।
📖 5. दुर्गा सप्तशती पाठ
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नवरात्रि के नौ दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
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यदि संभव न हो, तो किसी विद्वान ब्राह्मण से पाठ करवाएं।
🪔 6. अष्टमी/नवमी विशेष पूजन
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अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन करें – 9 कन्याओं व 1 बालक को आमंत्रित करें।
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उन्हें भोजन, दक्षिणा, वस्त्र, चूड़ियां, सिंदूर, चुनरी आदि अर्पित करें।
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हवन कर माँ को समर्पित आहुतियां दें।
🌼 7. नवमी को व्रत पारण एवं विसर्जन
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नवमी को व्रत पूर्ण कर, कलश व पूजन सामग्री का विसर्जन करें।
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देवी से परिवार, समाज, राष्ट्र की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
🕉️ वसंत नवरात्रि का महत्त्व
वसंत नवरात्रि आत्मिक जागरण, शक्ति उपासना और कर्मशुद्धि का पर्व है। यह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, धार्मिक अनुशासन और सिद्धि की प्राप्ति का अवसर प्रदान करता है।
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