सीताराम सीताराम सीताराम कहिए।
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए।।1. मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में,
तू अकेला नहीं प्यारे, राम तेरे साथ में,
विधि का विधान जान, हानि-लाभ सहिए।।
2. किया अभिमान तो फिर मान नहीं पाएगा,
होगा वही प्यारे जो श्रीराम जी को भाएगा,
फल आशा त्याग शुभ कर्म करते रहिए।।
3. जिन्दगी की डोर सौंप हाथ दीनानाथ के,
महलों में राखे चाहे झोंपड़ी में वास दे,
धन्यवाद निर्विवाद राम राम कहिए।।
4. आशा एक राम जी से दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक राम जी से दूजा नाता तोड़ दे,
काम रस त्याग प्यारे राम रस गहिए।।
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राम भक्ति में जीवन का संदेश: सीताराम कहिए, सुख पाइए 🌺
सीताराम सीताराम सीताराम कहिए।
जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए।।
श्रीराम नाम का स्मरण, जीवन के हर उतार-चढ़ाव में संबल देता है। यह कविता उसी भाव को सजीव करती है, जहाँ राम नाम में समाधान है, सेवा में सार है, और समर्पण में सुख है।
✨ 1. नाम स्मरण और सेवा का महत्व
मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में,
तू अकेला नहीं प्यारे, राम तेरे साथ में,
विधि का विधान जान, हानि-लाभ सहिए।।
➡️ जब श्रीराम का नाम हमारे होंठों पर होता है और उनके चरणों की सेवा हमारे कर्म में, तब जीवन की हर परिस्थिति में संतुलन बना रहता है। राम हर समय हमारे साथ होते हैं।
✨ 2. अभिमान का त्याग और कर्म की शुद्धता
किया अभिमान तो फिर मान नहीं पाएगा,
होगा वही प्यारे जो श्रीराम जी को भाएगा,
फल आशा त्याग शुभ कर्म करते रहिए।।
➡️ यह दोहा जीवन की वास्तविकता बताता है – अहंकार विनाश की ओर ले जाता है। श्रीराम जो चाहे वही होता है। हमें केवल शुभ कर्म करते जाना चाहिए, फल की चिंता बिना।
✨ 3. जीवन की डोर प्रभु के हाथ सौंपिए
जिन्दगी की डोर सौंप हाथ दीनानाथ के,
महलों में राखे चाहे झोंपड़ी में वास दे,
धन्यवाद निर्विवाद राम राम कहिए।।
➡️ जब हम अपनी जीवन की बागडोर भगवान को सौंप देते हैं, तब वह जहाँ भी रखें – महल या झोंपड़ी – उसमें आनंद और संतोष होता है। धन्यवाद और राम नाम ही जीवन का मूल मंत्र है।
✨ 4. राम में पूर्ण आस्था ही सच्चा सहारा है
आशा एक राम जी से दूजी आशा छोड़ दे,
नाता एक राम जी से दूजा नाता तोड़ दे,
काम रस त्याग प्यारे राम रस गहिए।।
➡️ इस चरण में अद्भुत वैराग्य भाव है – संसार की मृग-मरीचिका से ऊपर उठकर केवल श्रीराम से नाता जोड़ने की प्रेरणा मिलती है। रामरस ही सर्वोच्च रस है।
🕉️ निष्कर्ष: राम ही आधार हैं, राम ही उद्धार हैं
इस भक्ति-कविता के माध्यम से एक सच्चे भक्त की भावना व्यक्त होती है – जहाँ समर्पण, सेवा, निष्काम कर्म, और एकनिष्ठ भक्ति जीवन का मूल मंत्र बन जाता है।
राम नाम में ही राहत है,
राम सेवा में ही सार है।
राम भक्ति में ही जीवन का सत्कार है।
📿 राम राम कहिए, जीवन धन्य करिए।

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