पंचदेवता पूजन: कलश, गणेश, वरुण व हनुमान ध्यान मंत्र और पूजन विधि
🔸 गणेश ध्यान मंत्र (Shri Ganesh Dhyana Mantra)
मंत्र:
"शरीरे सिंदूरं विलसति मुखेचैक दसनम्।
ललाटे त्रिपुन्डं तिलकं ममलं नेत्र त्रितयम्।।
गले माला शुभ ह्युदर मधिकं विस्तृत तरम्।
नमामि त्वां गौरिं सुभग तनयं विध्न समनम्।।"
भावार्थ:
यहाँ भगवान गणेश के दिव्य रूप का ध्यान किया गया है — जिनका शरीर सिंदूरवर्ण है, मुख पर एक दंत है, ललाट पर त्रिपुण्ड तिलक है, गले में माला और उदर विशाल है। जो विघ्नों का नाश करने वाले हैं।
🔸 वरुण ध्यान मंत्र (Shri Varun Dhyana Mantra)
मंत्र:
"घटे धान्या धारे कनक कलशाद्याक्षत ह्युतै:।
तु पूर्वे श्री गंगे विमल यमुना नीर निकरै:।।
...
ॐ अपां पतये वरुणाय नमः॥"
भावार्थ:
कलश में स्थित पवित्र जल और नदी रूपी गंगायामुना के माध्यम से जल के अधिपति वरुण देव का ध्यान किया गया है। वे धर्म, नीति, बुद्धि और शांति के अधिष्ठाता माने गए हैं।
(सभी वरुण ध्यान मंत्रों को भावार्थ सहित जोड़ें।)
🔸 हनुमान ध्यान मंत्र (Shri Hanumat Dhyana Mantra)
मंत्र:
"हे हनुमान महा बलवान सुजान सुनो विनती एक मोरी।
श्री रघुनाथन के प्रिय भक्त कृपा करी देखहु तुमम ओरी।।"
भावार्थ:
यहाँ भक्त भगवान हनुमान से करुणा पूर्वक निवेदन कर रहा है कि वे कृपा कर अपने दर्शन दें और उसकी विनती को स्वीकार करें।
🔸 आशीर्वाद मंत्र
मंत्र:
"आनंद काले बहु राज लक्ष्मी:।
शिव प्रसादात्त धन धान्य वृद्धि:।।"
भावार्थ:
इस आशीर्वचन के माध्यम से सुख, समृद्धि, आयु, और विजय की कामना की जाती है।
🔹 पंचदेवता पूजन विधि संक्षेप में:
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कलश स्थापना – जल, आम्रपत्र, सुपारी, अक्षत से पूजन।
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श्री गणेश पूजन – विध्न नाश के लिए प्रथम पूजन।
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वरुण देव पूजन – कलश में विराजित वरुण देव की स्तुति।
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हनुमान पूजन – रक्षा, बल और साहस की कामना।
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आशीर्वचन – सभी देवी-देवताओं से मंगल कामना।
📌 निष्कर्ष:
पंचदेवता पूजन भारतीय संस्कृति में शुभारंभ, यज्ञ, विवाह या किसी भी मांगलिक कार्य से पहले किया जाता है। इन ध्यान मंत्रों के माध्यम से भक्त अपने मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध कर परमात्मा की आराधना करता है।

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