शिव वास की गणना करने के लिए, तिथि को 2 से गुणा करें, उसमें 5 जोड़ें और फिर 7 से भाग दें. जो शेषफल बचता है, उससे शिव वास का पता चलता है: शेष 1 रहने पर शिवजी कैलाश पर होते हैं, शेष 2 रहने पर माता गौरी के साथ होते हैं, और शेष 3, 4, 5, 6 व 0 पर उनका निवास स्थान क्रमशः वृषारूढ़, सभा, भोजन, क्रीड़ा और श्मशान में होता है.
शिव वास की गणना विधि
- 1. तिथि का मान निकालें:शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से पूर्णिमा तक की तिथि को 1 से 15 तक का मान दें. कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक की तिथि को 16 से 30 तक का मान दें.
- 2. गणना करें:उस तिथि के मान को 2 से गुणा करें और उसमें 5 जोड़ दें.
- 3. भाग दें:प्राप्त संख्या को 7 से भाग दें.
शेषफल और शिव वास
- शेषफल 1:शिव वास कैलाश पर होता है, जो पूजा के लिए शुभ फलदायी होता है.
- शेषफल 2:शिव वास गौरी के पास होता है, जो सुख-संपदा प्रदान करने वाला होता है.
- शेषफल 3:शिव वास वृषारूढ़ (वृषभ पर सवार) होता है, जो अभीष्ट सिद्धि और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है.
- शेषफल 4:शिव वास सभा में होता है, जो संताप देने वाला माना जाता है.
- शेषफल 5:शिव वास भोजन पर होता है, जो भक्त के लिए पीड़ादायी हो सकता है.
- शेषफल 6:शिव वास क्रीड़ा में होता है, जो कष्टकारी हो सकता है.
- शेषफल 0 (शून्य):शिव वास श्मशान में होता है, जिसे अशुभ माना जाता है.
कब नहीं देखना चाहिए शिव वास
- श्रावण माह में शिव वास नहीं देखना चाहिए.
- महाशिवरात्रि पर शिव वास देखने की आवश्यकता नहीं होती.
- ज्योतिर्लिंग पर रुद्राभिषेक के लिए शिव वास नहीं देखा जाता.
पंडित 'शशी भूषण शास्त्री
9755070636
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