काल भैरव को प्रकट करने का मन्त्र
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॥ मंत्र ॥
ॐ काली कंकाली।
महाकाली के पुत्र।
कंकाल भैरव हुकुम हाजिर रहे।
मेरा भेजा रक्षा करे।
आन बाँधूँ।
बान बाँधूँ।
फूल में भेजूं फूल मैं जाय।
कोठे जि पडे थर थर कांपे।
हल हल हैले।
गिरी गिरी परे।
उठी उठी भगे।
बक बक बके।
मेर भेजा सवा घड़ि।
पहर सवा।
दिन सवा।
मास सवा।
सवा बरस को बावला न करे।
तो माता काली कि शय्या पे पग धरे।
वाचा चुके।
तो उमा सूखे।
वाचा छोड़ कुवाचा करै।
धोबी कि नाँद।
चमार के कुंढे में पड़ै।
मेर भेजा बावला न करैं।
तो रुद्र के नेत्र से आग की जवाला कढै।
सिर कि जटा टुट भूमि में गिरे।
माता पार्वती के चिर पे चोट पडे।
बिन हुकुम नहि मारना।
हे काली के पुत्र कंकाल भैरव।
फुरे मन्त्र ईश्वरो वाचा।
सत्य नाम आदेश गुरु को।
विधि: इस मन्त्र का अनुष्ठान ४० दिनों का है। ४० दिनों तक २१ माला प्रतिदिन करनी है। बाबा काल भैरव प्रकट हो जाएँगे ओर मनचाहा वर मांग लेना।
समाप्त
ॐ भयहरणं च भैरव:।
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