नाम संकीर्तन में 16 कुंज
नाम संकीर्तन में उल्लेखित 16 कुंजों और पंचसखा के नामों का संबंध भक्ति-रास की परंपरा और भक्तों के ध्यान व आराधना के रूप में है। ये कुंज और इनके स्वामी भक्त समुदाय में विशेष महत्व रखते हैं, और इनके प्रतीकात्मक रूप से भक्ति के विविध पहलुओं का प्रदर्शन करते हैं।
16 कुंज और उनके स्वामी:
- राधिका - चन्द्रसुखदा कुंज
- दुतिका - बिलास कुंज
- ललिता - शारदा कुंज
- जम्बोबति - माधवी कुंज
- कमला - बकुल कुंज
- लबंगलता - चन्द्रिका कुंज
- चित्ररेखा - नैरुत कुंज
- वृन्दावती - अरुण कुंज
- लतिका - कामदा कुंज
- विशाखा - रसराज कुंज
- चित्रा - केलिकदम्ब कुंज
- चम्पकलता - सुखप्रमोदा कुंज
- त्रुउँग विद्या - अरुण कुंज
- इंदुरेखा - कदम्ब कुंज
- रंगदेई - मौलिक कुंज
- सुदेष्टा - भंडारी कुंज
मध्य के चार खंभे - वेद का प्रतीक:
मध्य के चार खंभे चार वेदों का प्रतीक माने जाते हैं, जो इस संकीर्तन स्थल के ज्ञान और सत्य की जड़ों को दर्शाते हैं।
पंचसखा:
बीच में स्थित पाँचवाँ खंबा पंचसखा का प्रतीक है। पंचसखा के नाम निम्नलिखित हैं:
- अद्वैत
- श्री निवास
- गादाधर
- नितय्यानंद
- चैतन्य
इन पंचसखा का संबंध गहरे भक्तिमय और धार्मिक संदेशों से है, जो संकीर्तन के माध्यम से अध्यात्मिक समर्पण और प्रेम का संदेश फैलाते हैं।
पं़शशीभूषण शास्त्री

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ओम्
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