सरल पूजा गणेश जी की लौकिक मंत्र
. आसन
पुष्पाक्षत लेकर आसन के लिए मंत्र बोलें:
ॐ विचित्र रत्न खचितं दिव्या स्तरण संयुतम्। स्वर्ण सिंहासनं चारु गृह्णी ष्वसुर पूजित्।आसन का शुद्धिकरण:
इदं आसनं ॐ भूर्भुवःस्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः।
2. पाद्य
- आचमनी या आम्रपल्लव से जल लेकर पाद्य मंत्र का उच्चारण करते हुए पाद्य दें:
ॐ सर्व तीर्थ समुद भूतं पाद्यं गन्धादि भिर्युतम्। विघ्नराज ! गृहाणेमं भगवन् ! भक्तवत्सलः।।
3. अर्ध्य
- चन्दनादि मिश्रित जल लेकर अर्ध्य प्रदान करें:
ॐ गणाध्यक्ष! नमस्तेऽस्तु गृहाण करुणाकर। अर्घ्यं च फल संयुक्तं गन्ध पुष्पा क्षतैर्युतम्।।
4. आचमन
- चन्दन या अन्य मिश्रित जल से आचमन करें:
ॐ विनायक! नमस्तुभ्यं त्रिदशैर भिवन्दित। गंगो दकेन देवेश कुरुष्वा चमनं प्रभो।।
5. स्नान
- विभिन्न प्रकार के स्नान (दुग्धस्नान, दधिस्नान, घृतस्नान, मधुस्नान, शर्करास्नान, पंचामृत स्नान, शुद्ध स्नान):
- दुग्ध, दधि, घृत, मधु, शर्करा से स्नान कराएं।
- पंचामृत स्नान हेतु मंत्र:
ॐ पञ्चामृतं मया नीतं पयो दधि घृतं मधु। शर्करा च समायुक्तं स्नानार्थं प्रतिगृह्यतां।।
6. वस्त्रोपवस्त्र
- स्नान के बाद वस्त्र और उपवस्त्र समर्पित करें:
ॐ शीत वातोष्ण सन्त्राणं लज्जाया रक्षणं परं। देहालङ्कारणं वस्त्रं अतः शान्तिं प्रयच्छ मे।।
7. यज्ञोपवीत
- यज्ञोपवीत (जनेऊ) का समर्पण:
ॐ ब्रह्म यज्ञानं प्रथमं पुरस्ता द्विषीमतः सुरुचोव्वेन आवः।
8. चन्दन
- चन्दन का समर्पण करें:
ॐ श्रीखण्ड चन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरं। विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रति गृह्यताम्।
9. कुंकुम और अबीर
- कुंकुम, अबीर, सिन्दूर, गंध आदि का समर्पण करें:
ॐ कुङ्कुमं कामदंदिव्यं कामिनीकामसम्भवं। कुंकुमेनार्चनं देवं गृहाण परमेश्वर।।
10. अक्षत
- हरिद्रा मिश्रित अक्षत समर्पित करें:
ॐ अक्षताश्च सुरश्रेष्ठाः कुङ्कुमाक्ताः सुशोभिताः। मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वर।।
11. पुष्प-माला
- विभिन्न पुष्पों और पुष्पमालाओं का समर्पण:
ॐ माल्यादीनिसुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो। मयाऽहृतानि पुष्पाणि पूजार्थं प्रतिगृह्यतां।।
12. दूर्वा
- दूर्वांकुर का समर्पण करें (संख्या: 3, 5, 7):
ॐ दूर्वाङ्कुरान् सुहरितानमृतान् मङ्गलप्रदान्। आनीतांस्तव पूजार्थं गृहाण गणनायक।।
13. बिल्वपत्र
- बिल्वपत्र का समर्पण करें:
ॐ अमृतोद्भवं च श्रीवृक्षं शङ्क रस्य सदा प्रियम्। बिल्वपत्रं प्रयच्छामि पवित्रं ते सुरेश्वर।।
14. धूप
- धूप (सुगंधित धूप, जैसे गूगल, देवदार, नागरमोथा) का समर्पण करें:
ॐ वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः। आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यतां।।
15. दीप
- दीप का समर्पण करें:
ॐ अग्निर्ज्योतिर्ज्योतिर्नः स्वाहा सूर्यो ज्योतिर्वर्चः स्वाहा।
16. नैवेद्य
- नैवेद्य (प्रसाद) का समर्पण करें:
ॐ शर्कराखण्डखाद्यानि दधिक्षीरघृतानि च। आहारं भक्ष्य भोज्यं च नैवेद्यं प्रतिगृह्यतां।।
17. ताम्बूलादि मुखशुद्धि
- पान, सुपारी, लौंग, इलाइची आदि का समर्पण:
ॐ पूगीफलं महद्दिव्यं नागवल्लीदलैर्युतम्। एलादिचूर्णसंयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यताम्।
18. दक्षिणा
- दक्षिणा (भेंट) का समर्पण करें:
ॐ हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्।
19. आरती
- कपूर की आरती दिखाएं और जल गिराएं:
ॐ आ रात्रि पार्थिव ᳪ रजः पितुरप्रायि धामभिः।
20. पुष्पाञ्जलि
- पुष्पाञ्जलि समर्पित करें:
ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्।
21. प्रदक्षिणा
- प्रदक्षिणा (वर्तना) करें:
ॐ यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च। तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणं पदे पदे।
22. प्रार्थना
- गणेश जी से प्रार्थना करें:
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय।
इस प्रकार से पूजा का सम्पूर्ण विधान विधिपूर्वक और क्रम से पूरा किया जा सकता है।

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