पूरी आरती सहित गणेश पूजन की विस्तृत
विधि इस प्रकार है:
आरती
- आरती का विधान आरती श्लोक से प्रारंभ होता है। यह मंत्र
गणेशजी की स्तुति में गाया जाता है:
ॐ आ रात्रि पार्थिव रजः पितुरप्रायि धामभिः।
दिवः सदा सि बृहती वितिष्ठस आत्वेषं वर्तते तमः।।
- आरती करते समय दीपक में कर्पूर रखकर इसे जलाकर गणेशजी के
समक्ष आरती की जाती है। इस समय निम्न श्लोक का उच्चारण करें:
ॐ कदलीगर्भसम्भूतं कर्पूरं तु प्रदीपितम्।
आरार्तिकमहं कुर्वे पश्य मे वरदो भव ।।
मंत्रों
सहित पूरी गणेश पूजा विधि
- आसन: पुष्प और अक्षत लेकर इस मंत्र का उच्चारण करें और भगवान
गणेश को आसन प्रदान करें:
ॐ विचित्ररत्नखचितं दिव्यास्तरणसंयुतम्।
स्वर्णसिंहासनं चारु गृह्णीष्वसुरपूजित।।
इदं आसनं ॐ भूर्भुवःस्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः।
- पाद्य (चरण धोने का जल): आम्रपल्लव
से जल लेकर चरणों पर अर्पित करें:
ॐ सर्वतीर्थसमुदभूतं पाद्यं गन्धादिभिर्युतम्।
विघ्नराज ! गृहाणेमं भगवन् ! भक्तवत्सलः।।
- अर्घ्य (हाथ धोने का जल): चन्दन
युक्त जल से अर्घ्य प्रदान करें:
ॐ गणाध्यक्ष! नमस्तेऽस्तु गृहाण करुणाकर ।
अर्घ्यं च फल संयुक्तं गन्धपुष्पाक्षतैर्युतम्।।
- आचमन (पीने का जल):
जल लेकर गणेशजी को पीने के लिए
अर्पित करें:
ॐ विनायक! नमस्तुभ्यं त्रिदशैरभिवन्दित।
गंगोदकेन देवेश कुरुष्वाचमनं प्रभो।।
- स्नान (अभिषेक):
दूध,
दही,
घी,
गुड़, मधु
और पंचामृत से स्नान करें। प्रत्येक स्नान मंत्र का उच्चारण करें:
- दूध स्नान:
ॐ पयः पृथिव्यां पय ओषधीषु पयो दिव्यन्तरिक्षे पयोधाः।
- दही स्नान:
ॐ दधिक्राव्णो अकारिषं जिष्णोरश्वस्य वाजिनः।
- शुद्ध स्नान:
अंत में शुद्ध जल से स्नान कराएं:
ॐ मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम्।
- वस्त्र और उपवस्त्र:
स्नान के बाद वस्त्र अर्पित करें:
ॐ शीतवातोष्णसन्त्राणं लज्जाया रक्षणं परं।
- यज्ञोपवीत:
गणेशजी को जनेऊ पहनाएं:
ॐ ब्रह्म यज्ञानं प्रथमं पुरस्ताद्विषीमतः सुरुचोव्वेन आवः।
- चन्दन,
कुंकुम, अबीर, सिन्दूर
आदि: प्रत्येक को क्रमशः अर्पित करें।
- अक्षत:
ॐ अक्षताश्च सुरश्रेष्ठाः कुङ्कुमाक्ताः सुशोभिताः।
- पुष्प और माला:
विभिन्न प्रकार के पुष्प और
पुष्पमाला अर्पित करें:
ॐ माल्यादीनिसुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो।
- दूर्वा:
दूर्वा अर्पित करते समय मंत्र
बोलें:
ॐ त्वं दूर्वेऽमृतजन्मासि वन्दितासि सुरैरपि।
- बिल्वपत्र:
बिल्वपत्र अर्पित करें:
ॐ अमृतोद्भवं च श्रीवृक्षं शङ्करस्य सदा प्रियम्।
- सुगन्धित तेल,
इत्र आदि:
ॐ चम्पकाशोकवकुलमालतीमोगरादिभिः।
- धूप:
ॐ धूरसि धूर्व धूर्वन्तं धूर्व तं योऽस्मान् धूर्वति तं धूर्व यं
वयं धूर्वामः।
- दीप:
ॐ अग्निर्ज्योतिर्ज्योतिरग्निःस्वाहा सूर्योज्योतिर्ज्योतिः सूर्यः
स्वाहा।
- नैवेद्य (भोग):
नैवेद्य का चढ़ावा अर्पित करें:
ॐ नाभ्या आसीदन्तरिक्षम्।
- अखण्ड ऋतुफल (मौसमी फल):
ॐ याफलिनीर्याऽफला अपुष्पा याश्च पुष्पिणीः।
- पुनराचमन:
अंत में फिर से आचमन कराएं।
- ताम्बूल (पान-सुपारी):
ॐ पूगीफलं महद्दिव्यं नागवल्लीदलैर्युतम्।
- दक्षिणा (दान):
गणेशजी को दक्षिणा समर्पित करें:
ॐ हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे।
- अंतिम आरती:
कर्पूर से आरती करें और गणेशजी की
महिमा का वर्णन करें।
ॐ आ रात्रि पार्थिव रजः पितुरप्रायि धामभिः।
इस प्रकार, गणेश जी का पूजन
पूर्ण करें।

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