नवग्रह पूजन विधि : धार्मिक कार्यों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा

नवग्रह पूजन विधि धार्मिक कार्यों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके माध्यम से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि, और शांति की प्राप्ति होती है। नवग्रह पूजन से संबंधित विधि और मंत्रों का पालन करना विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण माना जाता है। इस पूजन का उद्देश्य ग्रहों के अशुभ प्रभावों से मुक्ति पाना और शुभ प्रभावों को आकर्षित करना होता है।



नवग्रह पूजन विधि (मंत्र सहित)

  1. स्नान और शुद्धि:

    • यजमान या यजमान दंपती को स्नान करके शुद्ध होना चाहिए। इसके बाद आचमन (साफ पानी पीने) और प्राणायाम (सांस की सफाई) करना चाहिए।
    • फिर, अपने कुलदेवता, ग्राम देवता और पितरों का ध्यान करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
  2. पूजन स्थल तैयार करें:

    • एक चौकोर पीढ़े पर नवग्रह मंडल की रचना करें।
    • साथ में कलश और गणेश की स्थापना करें।
    • गोबर का गौरी-गणेश या गड़ी-गोला की स्थापना करें।
  3. पृथ्वी माता और दिशा रक्षा:

    • पृथ्वी माता का ध्यान और आवाहन करें।
    • यजमान को रक्षासूत्र बांधे और पंच देवता (विष्णु, गणेश, अम्बिका, वरुण) की पूजा करें।
    • इसके बाद दिशा रक्षा विधान करें।
  4. नवग्रह पूजन मंत्र:

    • सभी ग्रहों का आवाहन एक-एक करके करें और प्रत्येक ग्रह से संबंधित मंत्रों का उच्चारण करें।

प्रत्येक ग्रह की पूजा विधि और मंत्र:

  1. सूर्य पूजन:

    • लाल अक्षत और पुष्प लेकर सूर्य का आवाहन करें।
    • मंत्र:
      • "ॐ आकृष्णेन रजमा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यञ्च ।"
  2. चंद्र (सोम) पूजन:

    • श्वेता अक्षत और पुष्प लेकर चंद्र देवता का आह्वान करें।
    • मंत्र:
      • "ॐ इमं देवा असपत्न सुवध्वं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय..."
  3. भौम (मंगल) पूजन:

    • रक्त अक्षत और पुष्प लेकर मंगल देवता का आह्वान करें।
    • मंत्र:
      • "ॐ अग्निर्मूर्द्धा दिवः ककुत्पतिः पृथिव्याऽ अयम् ।"
  4. बुध पूजन:

    • हरा अक्षत और पुष्प लेकर बुध देवता का आह्वान करें।
    • मंत्र:
      • "ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते स$ सृजेथामयं च ।"
  5. गुरु (बृहस्पति) पूजन:

    • पीला अक्षत और पुष्प लेकर गुरु (बृहस्पति) देवता का आह्वान करें।
    • मंत्र:
      • "ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद्युमद्विभाति..."
  6. शुक्र (भार्गव) पूजन:

    • श्वेता पुष्प और अक्षत लेकर शुक्र देवता का आह्वान करें।
    • मंत्र:
      • "ॐ अन्नात्परिस्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत्..."
  7. शनि पूजन:

    • काले अक्षत और फूल लेकर शनि देवता का आह्वान करें।
    • मंत्र:
      • "ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये..."
  8. राहु पूजन:

    • नीले अक्षत और फूल लेकर राहु का आह्वान करें।
    • मंत्र:
      • "ॐ कयानश्श्चित्रऽआभुवदूती सदावृधः..."
  9. केतु पूजन:

    • धूम्र रंग का अक्षत और पुष्प लेकर केतु देवता का आह्वान करें।
    • मंत्र:
      • "ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या$ अपेशसे..."

नवग्रह ध्यान और शांति मंत्र:

  • नवग्रह ध्यान:
    "आयुश्च वित्तं च तथा सुखं च धर्मार्थलाभौ बहुपुत्रतांच..."

  • नवग्रह शांति मंत्र:
    "ब्रह्मामुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमि-सुतो बुधश्च गुरुश्च..."

पूजन का समापन:

  • नवग्रह पूजन के बाद, पूजा में प्रयोग किए गए सभी वस्त्र, पुष्प, जल और सामग्री का नैवेद्य अर्पित करें और जल से आचमन करें।
  • समापन मंत्र का उच्चारण करें और सभी देवताओं का आभार व्यक्त करें।

यह विधि और मंत्र नवग्रह पूजन के दौरान अनुसरण करने से मनुष्य के जीवन में समृद्धि, सुख, और शांति आती है।

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