गायत्री मंत्रों के छत्तीसगढ़ी में सरल भावार्थ:
1. गणेश गायत्री मंत्र
संस्कृत:
एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
छत्तीसगढ़ी भावार्थ:
हम एकदंती (एक दांत वाला) भगवान गणेश ला जानथन, वक्रतुण्ड (टेढ़ा सूंड वाला) ला मन में धरथन, वो दंती देवता हमन के बुद्धि सही दिशा में लगाय।
2. दुर्गा गायत्री मंत्र
देव्यै ब्राह्मण्यै विद्महे कन्याकुमार्यै धीमहि। तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥
हम देवी ब्राह्मणी ला जानथन, कन्या रूप में ध्यान करथन, ओ महादेवी दुर्गा हमन के सही रास्ता देखाय।
3. शिव गायत्री मंत्र
नागेन्द्रहाराय विद्महे पाशुपताय धीमहि। तन्नः शंभुः प्रचोदयात्॥
हम नाग के माला पहिने वाले शिव जी ला जानथन, पाशुपति रूप में ध्यान करथन, वो शंभू देवता हमन के बुद्धि से आगे बढ़ाय।
4. हनुमान गायत्री मंत्र
आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो वीरः प्रचोदयात्॥
हम अंजनी के लइका, वायुपुत्र हनुमान ला जानथन, ओ वीर देवता हमन ला शक्ति अउ समझ दे।
5. रूद्र (शिव) गायत्री मंत्र
तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
हम तत्पुरुष (सर्वश्रेष्ठ) शिव ला जानथन, महादेव के ध्यान करथन, वो रूद्र देवता हमन ला तेज अउ समझ दे।
6. सरस्वती गायत्री मंत्र
नमर्देव्यै विद्महे कल्याण्यै धीमहि। तन्नो रेवाः प्रचोदयात्॥
हम नमो देवी (सरस्वती) ला जानथन, कल्याणी रूप म ध्यान करथन, वो रेवती हमन के बुद्धि में प्रकाश भर दे।
7. दत्तात्रेय गायत्री मंत्र
दिगम्बराय विद्महे अवधूताय धीमहि। तन्नो दत्तः प्रचोदयात्॥
हम दिगम्बर (दत्तात्रेय) ला जानथन, अवधूत रूप म ध्यान करथन, वो दत्त देवता हमन ला ज्ञान दे।
8. विष्णु गायत्री मंत्र
नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
हम नारायण ला जानथन, वासुदेव रूप म ध्यान करथन, वो विष्णु देवता हमन के जीवन ला संवारें।
9. राम गायत्री मंत्र
दाशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात्॥
हम दशरथ पुत्र राम ला जानथन, सीता के प्रिय रूप म ध्यान करथन, वो श्रीराम हमन ला धर्म के राह दिखाय।
10. सीता गायत्री मंत्र
जनकात्मजायै विद्महे रामप्रियायै धीमहि। तन्नः सीता प्रचोदयात्॥
हम जनक के बेटी सीता ला जानथन, राम के प्रिय रूप म ध्यान करथन, वो सीता माता हमन ला सेवा अउ सहनशीलता सिखाय।
11. लक्ष्मण गायत्री मंत्र
दाशरथाय विद्महे जाम्बवत्याय धीमहि। तन्नो लक्ष्मणः प्रचोदयात्॥
हम दशरथ के बेटा लक्ष्मण ला जानथन, जाम्बवती के सेवक रूप म ध्यान करथन, वो लक्ष्मण देवता हमन ला निष्ठा सिखाय।
12. सूर्य गायत्री मंत्र
मार्कण्डेयाय विद्महे सहस्त्रकिरणाय धीमहि। तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्॥
हम मार्कण्डेय ऋषि के उपास्य सूर्य ला जानथन, हजारों किरन वाला देवता के ध्यान करथन, वो हमन ला तेज दे।
13. लक्ष्मी गायत्री मंत्र
महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥
हम महालक्ष्मी ला जानथन, विष्णु के पत्नी के रूप म ध्यान करथन, वो लक्ष्मी माता हमन ला समृद्धि दे।
14. कृष्ण गायत्री मंत्र
देवकीनन्दनाय विद्महे कृष्णवल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात्॥
हम देवकी के लइका श्रीकृष्ण ला जानथन, राधा के प्रिय के ध्यान करथन, वो राम स्वरूप हमन ला भक्ति दे।
15. गरुड़ गायत्री मंत्र
विनतात्मजाय विद्महे सुपर्णरूपाय धीमहि। तन्नो गरुढः प्रचोदयात्॥
हम विनता के बेटा गरुड़ देव ला जानथन, सुपर्ण (पंखधारी) रूप म ध्यान करथन, वो हमन ला रक्षा करं।
16. वृषभ (नंदी) गायत्री मंत्र
तीक्ष्णायज्ञाय विद्महे वेदपादाय धीमहि। तन्नो वृषः प्रचोदयात्॥
हम तीक्ष्ण बल वाले नंदी ला जानथन, वेद के पांव म विराजे देवता के ध्यान करथन, वो हमन ला सेवा भाव दे।
17. गुरु गायत्री मंत्र
परब्रह्मणे विद्महे गुरुदेवाय धीमहि। तन्नो गुरुः प्रचोदयात्॥
हम परब्रह्म (साक्षात ब्रह्म) रूपी गुरु ला जानथन, गुरुदेव के ध्यान करथन, वो हमन ला आत्मज्ञान दे।
18. कुबेर गायत्री मंत्र
वैश्रवणाय विद्महे धनाध्यक्षाय धीमहि। तन्नः कुबेरः प्रचोदयात्॥
हम वैश्रवण (कुबेर) देवता ला जानथन, धन के अधिपति के ध्यान करथन, वो कुबेर देवता हमन ला धन-बुद्धि दे।

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