1. इस दिन किसी सुहागिन ब्राह्मण स्त्री को अपने घर पर ससम्मान भोजन पर बुलाएं। कुतप काल में श्राद्ध विधि संपन्न कर उस महिला को उसकी रूचि के अनुसार भोजन करवाएं। भोजन में खीर अवश्य होनी चाहिए। इसके बाद महिला को सुहाग की सामग्री जैसे कुंकुम, टिकी, मेहंदी के साथ लाल वस्त्रों का दान करना चाहिए। साथ ही दक्षिणा भी अवश्य दें।
2. अगर विधि-विधान से श्राद्ध न कर पाएं तो अंगार (जलता हुआ कंडा) पर घी-गुड़ की आहुति दें और बोलें- ऊं मातृ देवताभ्यो नम:। साथ ही इस दिन गाय को हरा चारा भी खिलाएं और मृत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करें।
3. संभव हो तो इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन करवाएं। साथ ही महिलाओं को कुछ वस्त्र आदि का भी दान करें।
4. अगर घर पर किसी सुहागिन ब्राह्मण महिला न आए तो उसके घर पर भोजन सामग्री जैसे तेल, घी, दाल, चावल, आदि चीजें भिजवाएं। साथ ही सुहाग की सामग्री भी।
5. इस दिन सुबह किसी नदी या तालाब में स्नान करें और सूर्यदेवता को अर्घ्य देते हुए मृत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करें।
6. श्राद्ध की नवमी तिथि पर परिवार की बुजुर्ग महिलाओं के पैर चूकर आशीर्वाद लें और उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार कुछ उपहार भेंट करें।
7. इस दिन विवाहित बहन और बेटी को घर पर सपरिवार भोजन के लिए आमंत्रित करें और उन्हें भी वस्त्र आदि देकर ससम्मान विदा करें।
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👌👌
जवाब देंहटाएंGood going Shashi Mahraj
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