इस गान बखान के अर्थ में माँ की स्तुति और प्रार्थना की गई है। इसे विस्तार से समझते हैं:
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शक्ति स्वरूपा और मंगल कारिनी: माँ को शक्ति का स्वरूप माना गया है, जो सृष्टि का कल्याण करती हैं। उनकी कृपा से सभी कार्य सफल होते हैं।
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काज सवारिनी हो सबके: माँ सबके कार्यों को सही दिशा में ले जाती हैं और जो अड़चनें या कठिनाइयाँ हैं, उन्हें दूर करती हैं।
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जो तुम्हारी रहै कृपा तो बनै सब काजन: यदि माँ की कृपा बनी रहे, तो सभी कार्य सहजता से पूर्ण हो जाते हैं।
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सीता ने पूजा तुम्हारी:माता सीता ने भी माँ गौरी की पूजा की थी, जिससे माँ प्रसन्न हुईं और उन्हें भगवान राम जैसा पति प्राप्त हुआ।
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मेरी भी कामना पूर्ण करो: गान से गायक माँ गौरी से प्रार्थना कर रहा है कि जैसे आपने सीता माता की मनोकामना पूरी की, वैसे ही मेरी भी इच्छाएँ पूरी करें।
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कष्ट हरने की विनती: अंत में यह प्रार्थना है कि माँ, हमारे भी दुःख और कष्टों को हर लें और हमें सुख-शांति प्रदान करें।
यह भजन माँ गौरी (पार्वती) के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। इसमें उनके आशीर्वाद से जीवन के कष्टों से मुक्ति और इच्छाओं की पूर्ति की प्रार्थना की गई है।
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